शांतिकुंज में गायत्री दीपमहायज्ञ के साथ श्रद्धापूर्वक हुआ होलिका दहन
रिपोर्ट श्रवण झा
हरिद्वार-गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में होलिका दहन का पर्व आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया।यहां प्रत्येक पर्व,त्यौहार परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ ही उसके पीछे छिपे नैतिक और सामाजिक संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।यही कारण है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार विश्वभर में सनातन संस्कृति के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाता आ रहा है।
उल्लेखनीय है कि शांतिकुंज के संस्थापक पूज्य युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य ने पर्व-त्योहारों को आत्मपरिष्कार और समाज निर्माण से जोड़ा।उनकी प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में गायत्री दीपमहायज्ञ का विशेष आयोजन किया गया,जिसमें शांतिकुंज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं सहित देश-विदेश से आए हजारों साधकों ने सहभागिता की।दीपों की पावन ज्योति और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।होलिका दहन पर्व के अवसर पर उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ.प्रणव पण्ड्या ने कहा कि होलिका दहन केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय और भक्ति की अटूट शक्ति का प्रतीक है।गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय अत्यंत महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी है।ऐसे समय में हम सभी का दायित्व है कि सनातन संस्कृति के मूल्यों सत्य,प्रेम,करुणा,सेवा और सदाचार को अपने जीवन में धारण करें तथा उन्हें घर-घर तक पहुँचाएँ।आस्था और धर्मनिष्ठा को नहीं छोड़ा तथा अंततः सत्य की विजय हुई।यही प्रेरणा हम सभी के लिए मार्गदर्शक है।होलिका दहन का वैदिक कर्मकाण्ड विद्वान आचार्यों द्वारा संपन्न कराया गया।आचार्यों ने होलिका दहन के आध्यात्मिक महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह पर्व अहंकार,अन्याय,कुरीतियों और नकारात्मक प्रवृत्तियों के दहन का प्रतीक है।उपस्थित साधकों ने बुराइयों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लिया।वहीं होली के गीतों से संगीतज्ञों ने उपस्थित साधकों को उल्लसित किया।पर्व पूजन के दौरान गायत्री परिवार के प्रमुखद्वय डॉ.प्रणव पण्ड्या एवं श्रद्धेया शैलदीदी ने करोड़ों परिजनों के प्रतिनिधि स्वरूप विशेष पूजन किया।वहीं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या तथा महिला मंडल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या ने विधिवत होलिका दहन संपन्न कराया।इस अवसर पर सभी ने समाज में सद्भाव,नैतिकता और सांस्कृतिक जागरण के विस्तार का संकल्प दोहराया।शांतिकुंज में आयोजित यह पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा, सामूहिक एकता और आत्मशुद्धि का प्रेरणास्पद संदेश देकर संपन्न हुआ।
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