किसान का परिश्रम ही खिलाड़ी की सफलता का मूल मंत्र - प्रमोद बैटला
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-कुशल किसान का जीवन,नियमित एवं नियत्रित दिनचर्या तथा खेत मे किसान का परिश्रम खिलाडी से उत्तम खिलाडी तराशने तथा सफलता के मानक प्रदान करने मे सर्वाधिक उपयोगी है।इस सबसे सफल उदाहरण हॉकी के जादूगर ध्यान चन्द रहे है।ये विचार एशियन मेडलिस्ट तथा ओलम्पिक टीम के सदस्य रहे प्रमोद बैटला ने गुरुकुल कांगडी समवि0वि0 के मेजर ध्यान चन्द सभागार मे प्रशिक्षु शारीरिक शिक्षकों एवं खिलाडियों को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये।
खेलो मे प्रतिभाओं को बढावा एवं अवसर देने के उददेश्य से आयोजित व्याख्यान मे उन्होने कहॉ कि खिलाडी के जीवन मे तकनीकी शिथिलता अवरोध का काम करती है। ग्रामीण परिवेश तथा दूर-दराज के ग्रामीण अंचल आज भी खिलाडियों के बडे हब के रूप मे अपना योगदान दे रहे है।प्रभारी,शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग डॉ.अजय मलिक ने कहॉ कि खेल विशेषज्ञों का गुरूकुल तथा हॉकी के साथ जुडाव आज भी प्रासंगिक है।ए. .प्रोफेसर डॉ.शिवकुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुये कहा कि देश मे आज भी परिश्रम से उत्कृष्ठता के शिखर पर पहुॅचे खिलाडियों की लम्बी फेहरिस्त इसका सबसे बडा उदाहरण है।खिलाडियों की प्रतिभा तथा प्रतिभाग कई मायनों मे सिस्टम के कारण भी रूकावट से ग्रसित होता है।कार्यक्रम मे डॉ.कपिल मिश्रा,डॉ.अनुज कुमार,डॉ.प्रणवीर सिंह,डॉ.सुनील कुमार,दुष्यन्त राणा,कुलदीप रतूडी, अश्वनी कुमार,सुरेन्द्र सिंह,कुलदीप आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम मे एम.पी.एड.,बी.पी.एड. तथा बी.पी.ई.एस.के प्रशिक्षु छात्र उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन डॉ.कपिल मिश्रा द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ.शिवकुमार चौहान द्वारा किया गया।
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