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श्री यंत्र मंदिर कनखल में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा,

 श्री यंत्र मंदिर कनखल में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा,

रुक्मिणी-कृष्ण विवाह का हिंदू धर्म में आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व -आचार्य नीरज जोशी

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- पुरुषोत्तम मास के अवसर पर श्रीयंत्र मंदिर कनखल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को विस्तार देते हुए कथा व्यास आचार्य नीरज जोशी ने कहा कि रुक्मणी कृष्ण विवाह प्रेम और धर्म की विजय का प्रतीक है। इस विवाह का आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व है।यह केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं,बल्कि पूर्ण समर्पण,प्रेम और धर्म की विजय का प्रतीक है।

उन्होंने माता रुक्मणी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बखान करते हुए कहा कि माता रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना गया है,जो नारायण जाने कृष्ण की शाश्वत संगिनी हैं। उन्होंने कहा कि कृष्ण और रुक्मणी का प्रेम निस्वार्थ और सच्चा है,रुक्मिणी का प्रेम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने बिना देखे केवल कृष्ण के गुणों और उनकी महिमा सुनकर उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया था।कथा व्यास आचार्य नीरज जोशी ने रुक्मणी कृष्ण के प्रेम विवाह को विस्तार देते हुए बताया कि जब रुक्मणी के भाई ने उनकी इच्छा के विरुद्ध शिशुपाल के साथ उनका विवाह तय कर दिया,तब रुक्मिणी ने कृष्ण को एक गुप्त पत्र लिखकर अपनी रक्षा और स्वयंवर की विनती की थी।यह ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्म-समर्पण को दर्शाता है। विकास आचार्य कहते हैं कि ईश्वर हमेशा अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण रुक्मणी का भगवान कृष्ण को पुकारा है जैसे ही भगवान कृष्ण को रुक्मणी ने सच्चे मन से पुकार के साक्षात उनके सामने प्रकट हो गए यदि कोई भक्त शुद्ध हृदय और अनन्य प्रेम से भगवान को पुकारता है,तो ईश्वर स्वयं उसकी रक्षा के लिए आते हैं और उसकी इच्छा पूरी करते हैं।कथा व्यास आचार्य ने कहा कि रुक्मिणी का हरण करके कृष्ण का द्वारका पहुंचना और शिशुपाल तथा जरासंध जैसे अहंकारी राजाओं को परास्त करना यह संदेश देता है कि प्रेम और धर्म की राह में आने वाली हर बाधा को ईश्वर नष्ट कर देते हैं। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का कलयुग में विशेष महत्व है और पुरुषोत्तम मास में इस कथा का बखान करने से मनुष्य को जन्म और मृत्यु के चक्र से होती है।श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य आयोजक हेमचंद्र जोशी प्रकाश चंद्र जोशी,रमेश चंद्र जोशी ने सभी अतिथियों का आभार बताया।इस अवसर पर आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी मोहन चंद्र भट्ट श्रीमती दीपा पंत भट्ट कनखल व्यापार मंडल के अध्यक्ष भगवत शरण अग्रवाल,उमा जोशी,मालती जोशी,गुंजन जोशी,हर्षित जोशी,भावेश पंत, कमल पंत,पीयूष तिवारी सुधीर पंत,विशाल शर्मा, योगेश पांडे आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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