देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान का महत्वपूर्ण अंग है भावी पीढ़ी का निर्माण- डॉ पण्ड्या
संस्कारित पीढ़ी निर्माण हेतु नैतिक शिक्षा पर मंथन, मप्र व महाराष्ट्र के 300 शिक्षक शामिल
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विभाग के नेतृत्व के दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ।शिविर का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय संस्कृति ,नैतिक मूल्यों और जीवनदृष्टि से जोड़ते हुए भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण हेतु प्रेरित करना है।इस शिविर में मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र के 300 से अधिक शिक्षक,प्राचार्य और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
शिविर के प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा चलाया जा रहा देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान भावी पीढ़ी के निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की वास्तविक आधारशिला विद्यालयों में रखी जाती है और शिक्षक इस निर्माण प्रक्रिया के प्रमुख निर्माता होते हैं। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में केवल शिक्षा(डिग्री)पर्याप्त नहीं है,बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार,संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही आवश्यक है।उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी को पढ़ाई के साथ नैतिक शिक्षा भी दी जाए,तभी समाज का वास्तविक और संतुलित विकास संभव हो सकेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा बच्चों में नैतिक चेतना,सांस्कृतिक आत्मगौरव और राष्ट्रीय भावना विकसित करने का एक प्रभावी अभियान है,जो विद्यार्थियों को आदर्श नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के समन्वयक ने बताया कि शिविर में सहभागी शिक्षक अपने क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच सांस्कृतिक जागरूकता का वातावरण तैयार करेंगे।उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान भारतीय संस्कृति,पारिवारिक मूल्यों,आदर्श जीवनशैली और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया।इस अवसर पर परमानंद द्विवेदी, प्रो.प्रमोद भटनागर, रामयश तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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