15 दिवसीय सरोद कार्यशाला का शास्त्रीय वाद्य संगीत से सजी कई मनमोहक प्रस्तुतियों से हुआ संपन्न
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी एवं 'स्पर्श "प्रयास के संयुक्त तत्वाधान में आज 7 से 21 जून तक चली सरोद कार्यशाला का समापन शास्त्रीय वाद्य संगीत से सजी कई मनमोहक प्रस्तुतियों से संपन्न हुआ। कार्यकम दो सत्र में संपन्न हुआ प्रथम सत्र का शुभ आरम्भ सुधाकर अग्रवाल संबोधन से हुआ,उन्होंने कहा कि शहर में सरोद जैसे सुंदर एवं कर्णप्रिय वाद्य के साथ असाध्य कार्य को पूर्ण करने का कार्य स्पर्श प्रयास के संस्थापक एवं प्रशिक्षक पंकज शंकर मल्होत्रा द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम की प्रथम प्रस्तुति में राग यमन में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई जिसमें 18 सरोद ,4 सितार,2 इसराज,संतूर जैसे परंपरागत वाद्यों के साथ बजाया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ए पर्व विधायक संजय गर्ग ने कहा कि बच्चों को सही समय पर उनके माता पिता ने शास्त्रीय संगीत से जोड़ा है, मोबाइल से ध्यान हटाकर बच्चों ने शास्त्रीय वाद्यों का हाथ थामा है।कार्यक्रम ने पर्याविद डॉ एस के उपाध्याय ने कहा कि बच्चों को इस सरोद की कार्यशाला के "नाद प्रवाह " से जोड़ा गया हैं ये प्रवाह इन बच्चों के जीवन में विशेष भूमिका निभाएगा। द्वितीय सत्र का आरम्भ डॉ रूपेश ,आयुक्त सहारनपुर मंडल के संबोधन से हुआ उन्होंने कहा कि बच्चों को भारतीय शास्त्रीय वादन की परंपरा से जोड़ा जा रहा है।सहारनपुर में इतनी बड़ी संख्या में बच्चे शास्त्रीय संगीत वादन से जुड़ रहे है यह प्रसन्नता की बात है।शास्त्रीय संगीत बच्चों के मन मस्तिष्क को संतुलित एवं सक्रिय करता है।उन्होंने कहा कि एक साथ 18 सरोद को देखना बहुत ही यदा कदा और बहुत सुखद है।आयुक्त डॉ रूपेश ने सभी बच्चों को सरोद कार्यशाला के लखनऊ से आये प्रमाण पत्र वितरित किएआशा मॉडर्न स्कूल के प्रबंधक भव्य जैन ने कहा कि आशा मॉडर्न स्कूल को सरोद कार्यशाला के लिए चुना जाना पूरे आशा मॉडर्न परिवार के लिए गौरव की बात है हम हमेशा इस प्रकार के कार्यक्रमों में अग्रिम भूमिका निभाएंगे।कार्यशाला और स्पर्श प्रयास के प्रशिक्षक एवं संस्थापक पंकज शंकर ने बताया कि इस कार्यशाला में मुख्य रूप से सरोद वाद्य का प्रशिक्षण देते हुए राग यमन सिखाया गया बच्चों ने सरोद के साथ साथ इसराज,बांसुरी, सितार हारमोनियम भी सीखा।अंतिम प्रस्तुति में विश्व प्रसिद्ध सितार वादक भारत रत्न पंडित रवि शंकर जी की सृजन की गई राग यमन की कंपोजीशन प्रस्तुत की गई जिसे पंकज शंकर ने पहली सीख के रूप में अपने गुरु पंडित पार्थों सारथी जी से सीखा है और उसी गुरु शिष्य परंपरा से बच्चों को सिखाया है18 सरोद प्रयुक्त हुए है जिनमें से 13 सहारनपुर में ही बने है। एकल प्रस्तुति में निकिता सिंह ने सरोद पर राग अहिर भैरव,पूर्व ने संतूर पर राग भूपाली,रुद्र मोंगा ने सरोद पर राग किरवानी,अमी नगर ने सितार पर राग भैरव,शुभ एवं अनन्या चौधरी ने इसराज पर राग यमन प्रस्तुत किया। समन्वयक शैफाली मल्होत्रा ने बताया कि इस कार्यशाला में आशा मॉडर्न स्कूल चन्दर नगर,आशा मॉडर्न दिल्ली रोड सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल एथेनिया प्रेप,सेंट मैरी एकेडमी ,सहारनपुर पब्लिक स्कूल रेन ड्राप्स स्कूल,पाइनवुड स्कूल,डी पी एस स्मॉल वंडर्स स्कूलसरस्वती विहार सीनियर सेकेंडरी स्कूल,अमरदेव स्कूल के 40 बच्चों ने भाग लिया। कार्यक्रम में उमेश कम्बोज,विज्ञान भारती के संजीव मित्तल,राजेंद्र शर्मा नितिन जैन ,सोनाली जैन,सुधीर जोशी उपस्थित थे।कार्यक्रम संयोजन में सुधांशु,रुद्र,कवन ,अमान्या,पूर्वा चिराग ,कृष्णा पारले सुचित का विशेष सहयोग रहा।


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