Ticker

6/recent/ticker-posts

कुंभ मेला-2027 की आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित

कुंभ मेला-2027 की आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित

सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं आपदा-सहिष्णु कुंभ आयोजन के लिए समन्वित रणनीति पर जोर

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- आगामी कुंभ मेला-2027 के सुरक्षित एवं सफल आयोजन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), मेला प्रशासन,उत्तराखंड पुलिस तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई।बैठक में संभावित आपदा जोखिमों,भीड़ प्रबंधन,निकासी योजना,सुरक्षा व्यवस्थाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने कहा कि कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन सर्वाेच्च प्राथमिकता है।उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है।प्रत्येक सेक्टर में आपदा प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता,आपातकालीन निकासी मार्गों का विकास,संवेदनशील स्थलों की पहचान,संचार तंत्र की मजबूती तथा त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।समय-समय पर मॉक ड्रिल एवं संयुक्त अभ्यास आयोजित कर सभी एजेंसियों की तत्परता सुनिश्चित की जाएगी।एनडीएमए के सलाहकार (संचालन एवं संचार) कर्नल कीर्ति प्रताप सिंह ने कहा कि कुंभ मेला-2027 जैसे विशाल आयोजन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए बहुस्तरीय एवं व्यापक तैयारियाँ आवश्यक हैं।उन्होंने कहा कि एनडीएमए द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन,जोखिम आकलन,क्षमता विकास,प्रशिक्षण,मॉक ड्रिल तथा आपदा प्रबंधन योजनाओं के निर्माण में राज्य सरकार एवं मेला प्रशासन को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।कुंभ को सुरक्षित एवं आपदा-सहिष्णु आयोजन बनाने के लिए पूर्व अनुभवों और सर्वाेत्तम व्यवस्थाओं का लाभ लिया जाएगा।कर्नल कीर्ति प्रताप सिंह ने संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर होटलों, अस्पतालों एवं अन्य भीड़भाड़ वाले स्थलों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने पर बल दिया।उन्होंने हरिद्वार रेलवे स्टेशन की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता भी बताई।बैठक में निर्णय लिया गया कि कुंभ मेला-2027 से पूर्व विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।भीड़ प्रबंधन को कुंभ मेले की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली,सीसीटीवी नेटवर्क,ड्रोन सर्विलांस, रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के प्रभावी संचालन आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में जीरो जोन व्यवस्था लागू करने पर भी चर्चा हुई।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कुंभ मेला) आयुष अग्रवाल ने प्रस्तावित सुरक्षा एवं ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था का प्रस्तुतीकरण करते हुए विभिन्न संभावित आपदा परिस्थितियों से निपटने की रणनीति साझा की।उन्होंने बताया कि प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान सेक्टर आधारित प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी। कुंभ मेला-2027 के लिए पृथक इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) गठित करने पर सहमति बनी,जिसके अंतर्गत विभिन्न विभागों की भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएंगी तथा सेक्टर कमांडरों की नियुक्ति की जाएगी। मेला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मनोज वर्मा ने बताया कि कुंभ क्षेत्र में 71स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से कुल 3,456बेड उपलब्ध रहेंगे,343 चिकित्सा अधिकारी और 481पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती की जाएगी।जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी श्रीमती मीरा रावत ने बताया कि जिले के 200प्रशिक्षित आपदा मित्र मेले के दौरान सेवाएँ देंगे,आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वयं सेवकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।बैठक में नगर आयुक्त नंदन कुमार,एनडीएमए के सहायक सलाहकार(संचालन)मेजर अशोक शुक्ल,उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह,लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता डी.पी.सिंह,यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता प्रदीप कुमार,जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता यशवीर मल्ल,एनडीआरएफ ,एसडीआरएफ,अग्निशमन,स्वास्थ्य,उत्तर रेलवे,परिवहन,वन,सिंचाई,आपूर्ति, युवा कल्याण एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

संघर्ष से सफलता तक दिल्ली-एनसीआर सहित देशभर में स्वाद का परचम लहरा रहा राणा अचार