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विश्व पर्यावरण दिवस पर कुंभनगरी में चलेगा ‘हरित हरिद्वार’अभियान,बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण

 विश्व पर्यावरण दिवस पर कुंभनगरी में चलेगा ‘हरित हरिद्वार’अभियान,बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- आगामी कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के अंतर्गत हरिद्वार को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से मेला प्रशासन द्वारा संचालित‘हरित हरिद्वार’अभियान के तहत विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को कुंभनगरी में व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका की पहल पर मेला अधिष्ठान,जिला प्रशासन तथा हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण(एचआरडीए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस अभियान में विभिन्न सामाजिक संगठनों,शिक्षण संस्थानों,स्वयंसेवी संस्थाओं एवं आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है।अभियान के अंतर्गत शहर की प्रमुख सड़कों,पार्कों,सार्वजनिक स्थलों,घाटों के आसपास के क्षेत्रों तथा कुंभ मेला क्षेत्र से जुड़े विभिन्न परिसरों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा ।इसके साथ ही जन सहयोग से लगाए जाने वाले पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई है,जिससे यह पहल दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन सके।मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक आवश्यकताओं में से एक है।जलवायु परिवर्तन,बढ़ते प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए वृक्षारोपण एवं हरित विकास को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने नागरिकों से प्रत्येक व्यक्ति द्वारा कम से कम एक पौधा लगाने एवं उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए।उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों,सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा इसे जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की।श्रीमती सोनिका ने बताया कि कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में पर्यावरण संरक्षण,स्वच्छता,सौंदर्यीकरण तथा हरित अवसंरचना के विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।‘हरित हरिद्वार’ अभियान को दीर्घकालिक स्वरूप दिया जा रहा है,जिसके माध्यम से शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय जागरूकता को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।उन्होंने कहा कि कुंभ जैसे विशाल आयोजन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए हरित क्षेत्रों का विस्तार,प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा जनसहभागिता आधारित प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

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