पर्यावरण संरक्षण सहभागिता कार्यक्रम आयोजित कर जागरूक किया
भविष्य को पर्यावरण के दुष्प्रभाव से बचाना ही मकसद- सुरेश जैन
पर्यावरण हेतु सामाजिक व शैक्षणिक जागरूकता जरूरी-कुलपति विमला वाई
पर्यावरण संरक्षण विषय नहीं बल्कि समय की आवश्यकता -संजय गर्ग
रिपोर्ट एसडी गौतम
सहारनपुर-संस्कार निधि के तत्वाधान में विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पर्यावरण मनीषी स्व: मनमोहन नाथ गर्ग की याद में आईआईटी कैंपस के आईपीटी सभागार में पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन, माँ शाकम्भरी देवी विश्वविधालय की कुलपति प्रो. विमला वाई तथा कार्यक्रम संयोजक पूर्व मंत्री व विधायक संजय गर्ग ने मां भारती व पर्यावरण मनीषी स्व: मनमोहन लाल गर्ग की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन ने पर्यावरण की जन जाग्रति को महत्व देते हुए कहा कि आज हमारा मकसद आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के उन दुष्प्रभावों से बचाना है जिसके दुष्परिणाम अभी से ही हमे मिलने प्रारम्भ हो गए है इसलिए पर्यावरण को लेकर जनजागरण की आवश्यकता है साथ ही आने वाले भविष्य के लिए तथा पर्यावरणीय रूप से प्लास्टिक, वृक्षो के कटान, नदी नालों की सफाई और पॉलीथिन जैसी घातक व्यवस्थाओं को समाज से खत्म करना होगा। उन्होंने उपस्थित समूह से अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर अपने आसपास के वातावरण को हराभरा रखते हुए अपने जीवन जीने के मार्ग को सुलभ करने और जल संचयकर वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। अध्यक्षता करते हुए माँ शाकम्भरी देवी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला वाई ने कहा कि पर्यावरण केवल सरकारी नीतियों की नही बल्कि सभी के लिए सामाजिक और शैक्षणिक जागरूकता भी जरूरी है, आज सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि पर्यावरण को लेकर भविष्य की चिंता करते हुए अभी से आने वाली समस्याओं के निदान की तरफ ध्यान दे ताकि समय रहते हम भविष्य के प्रति सचेत हो सके। उन्होंने पूर्व मंत्री/विधायक संजय गर्ग द्वारा किये जा रहे पर्यावरण के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें पर्यावरण प्रहरी और एक जिम्मेदार शहरी करार दिया। कार्यक्रम आयोजक व पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक विषय नही बल्कि एक आवश्यकता है, उन्होंने कौटिल्य शास्त्र का उदाहरण देते हुए संक्षेप में पर्यावरण के गुणदोष को बताया और कहा कि अपनी गलतियों के चलते एक देश साउथ अफ्रीका के केपटाउन बनाने से बचे, उन्होंने कहा कि उनकी वजह से ही हसनपुर के निकट कमिश्नर द्वारा तालाब पर कोठी बनाये जाने का प्रस्ताव निरस्त हुआ साथ ही गोगा म्हाडी और मेला गुघाल के जोहड़ को भी उनके द्वारा संरक्षित किया गया। महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना कर भविष्य में पर्यावरण को लेकर आने वाली भयावहता को समक्ष रखते हुए पर्यावरण स्थिति में सुधार लाने की बात कही। संस्कार निधि के अध्यक्ष डॉ. एसके उपाध्याय ने पर्यावरण जागरूकता पर लोगो को जागरूक रहने का सन्देश दिया। कार्यक्रम से पूर्व पौधे रोपितकर किये गये और पर्यावरण प्रहरियों को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र देकर सम्मानित भी किया गया। संचालन राकेश शर्मा ने किया। इस दौरान पूर्व प्राचार्य डॉ. योगेश गुप्ता, सुधीर जोशी, परीक्षित वर्मा, गुलशन नागपाल, प्रशासनिक अधिकारी राजेश्वर दयाल, पुण्य गर्ग, सुनील गुप्ता, रवि सिंघल, अनिल शर्मा, अमित गगनेजा, राकेश जैन, हेमंत अरोड़ा, हरपाल वर्मा, मनोज ठाकुर, आलोक अग्रवाल, पार्षद संजय गर्ग, उपसभापति मयंक गर्ग, बलबीर सिंह, नरेश पांचाल, महेंद्र सरदार, कंवरसेन सिद्धू, राजेश कुमार, जगपाल स्वामी, योगाचार्या अनीता शर्मा व माला शर्मा समेत सैंकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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