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दिल की धड़कन रुकने पर CPR से बच सकती है जान-डॉ. संजीव मिगलानी

दिल की धड़कन रुकने पर CPR से बच सकती है जान-डॉ. संजीव मिगलानी

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर-किसी भी व्यक्ति की जान बचाने के लिए हमेशा डॉक्टर या अस्पताल का तुरंत पहुंचना संभव नहीं होता। कई बार घटनास्थल पर मौजूद लोगों की सूझबूझ और सही समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सहारनपुर के लिंक रोड स्थित दयावती हॉस्पिटल में Hands to Care Welfare Society (HTC) के यूथ सेल द्वारा चलाए जा रहे इंटर्नशिप प्रोग्राम के अंतर्गत एक विशेष लाइफ सेविंग CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में इंटर्नशिप कर रहे युवाओं और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा जीवन बचाने वाली इस महत्वपूर्ण तकनीक को व्यवहारिक रूप से सीखा।

कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव मिगलानी और डॉ. नैना मिगलानी ने संयुक्त रूप से प्रतिभागियों को सीपीआर की पूरी प्रक्रिया समझाई और लाइव डेमो के माध्यम से बताया कि किसी व्यक्ति की सांस और धड़कन रुक जाने जैसी आपातकालीन स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट कितने महत्वपूर्ण होते हैं।डॉ. संजीव मिगलानी ने कहा कि सीपीआर केवल डॉक्टरों या मेडिकल स्टाफ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर नागरिक को इसकी बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रशिक्षण के माध्यम से कोई व्यक्ति अपने जीवन में कभी किसी एक इंसान की भी जान बचाने में सफल हो जाता है, तो इससे बड़ी उपलब्धि और कोई नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में समय पर और सही तरीके से सीपीआर देने से मरीज के जीवित बचने की संभावना लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसलिए यह तकनीक हर व्यक्ति को सीखनी चाहिए।डॉ. मिगलानी ने बताया कि कई बार कोई व्यक्ति अचानक चक्कर खाकर गिर जाता है, बेहोश हो जाता है, बिजली का करंट लगने से अचेत हो जाता है या किसी अन्य कारण से उसकी सांस और धड़कन बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सबसे पहले उसकी स्थिति का आकलन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह देखें कि व्यक्ति आवाज देने या हल्के से कंधा हिलाने पर कोई प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं। इसके बाद उसकी सांस और गले या गर्दन की नाड़ी (Carotid Pulse) की जांच करें। यदि सांस नहीं चल रही है और नाड़ी महसूस नहीं हो रही है तो तुरंत किसी अन्य व्यक्ति से एम्बुलेंस या मेडिकल सहायता बुलाने को कहें और बिना समय गंवाए सीपीआर शुरू करें। डॉक्टरों ने बताया कि मरीज को किसी समतल और कठोर स्थान पर पीठ के बल लिटाएं। इसके बाद अपनी एक हथेली को छाती के बीचों-बीच, दोनों निप्पलों के बीच वाले हिस्से (Breastbone) पर रखें और दूसरी हथेली को उसके ऊपर रखें। दोनों हाथ सीधे रखते हुए शरीर के वजन का उपयोग करें और लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर (वयस्क में) गहराई तक तेज और लगातार दबाव दें। प्रति मिनट लगभग 100 से 120 बार छाती दबाने की गति बनाए रखें। लगातार 30 बार छाती दबाने (Chest Compressions) के बाद मरीज का सिर हल्का पीछे की ओर झुकाएं, ठुड्डी ऊपर उठाएं, उसकी नाक बंद करें और मुंह से दो बार रेस्क्यू ब्रीथ (Rescue Breaths) दें। इसके बाद फिर से 30 बार छाती दबाने का क्रम शुरू करें। इस 30:2 के अनुपात को तब तक जारी रखें जब तक व्यक्ति में सांस या हरकत के संकेत दिखाई न दें, प्रशिक्षित मेडिकल टीम मौके पर न पहुंच जाए या आप पूरी तरह थक न जाएं। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि यदि किसी को कृत्रिम सांस देना संभव न हो तो केवल लगातार छाती दबाना (Hands Only CPR) भी मरीज के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।
सत्र को केवल सैद्धांतिक न रखकर पूरी तरह व्यवहारिक बनाया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्ति, इश्ता, प्रियांशु, मानवी और सत्यम सहित कई विद्यार्थियों ने स्वयं आगे आकर डमी पर सीपीआर देकर अभ्यास किया। डॉ. संजीव मिगलानी ने प्रत्येक विद्यार्थी का मार्गदर्शन किया और बताया कि सही स्थान, सही गहराई और सही गति के साथ सीपीआर देना कितना महत्वपूर्ण है।इस दौरान उपस्थित सभी विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण लिया और डॉक्टरों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि Hands to Care Welfare Society का यूथ सेल लगातार समाजसेवा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता रहता है। इससे पहले संस्था द्वारा पौधारोपण अभियान, योग कार्यक्रम तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया जा चुका है। आने वाले समय में भी शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, युवा विकास और समाजसेवा से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ा जा सके।कार्यक्रम में HTC के संस्थापक अध्यक्ष परम बत्रा, कोषाध्यक्ष विजय दत्ता तथा विशाल नरंग विशेष रूप से उपस्थित रहे।HTC Youth Cell की ओर से अध्यक्ष विशाल नरंग, ननिका तनेजा, अनुष्का वाधवा, नंदिनी गाखड़, पलक मिधा, उदित अरोड़ा, सक्षम सेठिया, राघव, निखिल, आर्यन, खुशी, सिमरन, नैन्सी, शीनम, सत्यम, मानवी, चिरजोत और हरगुन सहित टीम के सदस्य मौजूद रहे।इंटर्नशिप प्रोग्राम में भावनी कपूर, श्लोक, सिद्धि, उन्नति त्यागी, रोहित सचदेवा, सान्वी ढींगरा, सिमर ठक्कर, प्रियांशु चावला, इशिता सिंघल, कनक शर्मा, मनन अरोड़ा, याशिका चावला, श्रियांश, नियति ठक्कर, इल्मा, लविश बब्बर, अनमोल, आन्वी बेहल, अदिति, प्राप्ति ठक्कर, आराध्या, सत्यम नरंग, आरुषि मित्तल, रेनिता गुप्ता, गौरिका, आयुष मलिक, देव कुमार, वंश भटनागर, निखिल रावत, आर्यन सिंघल, इश्ता सेठी, मानशा मदान, शैव्या ठकराल, समृद्धि ढींगरा, खुशी, शीनम खुराना, मन भारद्वाज, गौरांशी बिंदल, अपर्णा, हरगुन कौर, काशवी, मिष्टी खुराना, सर्वांगी, अनुष्का वाधवा, वाणी राजपाल, लक्ष्य गोयल, मानवी मक्कड़, सक्षम सेठिया, आनंदिता देवनाथ, अनुष्का सिंह, कृपा मेहंदीरत्ता, पुनीत और ख्वाहिश जुनेजा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने डॉ. संजीव मिगलानी, डॉ. नैना मिगलानी तथा Hands to Care Welfare Society की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके लिए बेहद उपयोगी रहा और भविष्य में किसी आपातकालीन स्थिति में वे सीखी गई इस जीवनरक्षक तकनीक का सही उपयोग कर किसी जरूरतमंद की जान बचाने का प्रयास करेंगे।

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