Ticker

6/recent/ticker-posts

हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, हमारी पहचान और संस्कार भी है

हिंदी हमारी भाषा ही नहीं, हमारी पहचान और संस्कार भी है 

एम.जी.एम. पब्लिक स्कूल में ‘हिंदी: हमारी भाषा, हमारी पहचान’ विषय पर गोष्ठी का शानदार आयोजन

रिपोर्ट -रवि बख्शी

सहारनपुर-जनक नगर स्थित एम.जी.एम. पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस के अवसर पर “हिंदी : हमारी भाषा, हमारी पहचान” विषय पर एक सुंदर एवं विचारोत्तेजक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं साहित्यकारों ने हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।

गोष्ठी की शुरुआत स्कूल की छात्राओं आंचल, शिवानी, वृंदा, शगुन, आयशा, अनम, गुड़िया, प्रियांशी एवं सिंदरा ने अपने विचार रखते हुए की। छात्राओं ने कहा कि हिंदी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में प्रमुख है। जिस प्रकार हम अपनी मां को नहीं भूल सकते, उसी प्रकार हिंदी का सम्मान भी मां से बढ़कर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी बहुत प्यारी भाषा है और देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है।राम कुमार शर्मा ने कहा कि जापान और चीन जैसे देश अपनी-अपनी भाषाओं को प्राथमिकता देते हैं, जबकि भारत में हिंदी के लिए एक दिवस मनाने की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने बच्चों से हिंदी की मात्राओं और शुद्ध लेखन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
सारंग सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन के महासचिव रवि बख्शी ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। हिंदी हमारी भाषा, हमारी पहचान, हमारी ममता, हमारी भावनाएं, हमारे संस्कार और हमारी मिट्टी की खुशबू है। संतों की वाणी में भी हिंदी की मिठास दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी भाषा सीखना ज्ञानवर्धक है और सभी भाषाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा और हिंदी को भूलना उचित नहीं है।साहित्यकार रमेश चंद्र छबीला ने कहा कि जिस प्रकार हम वर्ष में एक बार अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं, उसी प्रकार हिंदी दिवस भी वर्ष में एक बार मनाया जाता है, यह चिंता का विषय है। हिंदी भारत माता की आत्मा है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए। भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान होती है।इस अवसर पर नीना शर्मा, अरुण कुमार सूरी तथा स्कूल के प्रबंधक-प्रधानाचार्य सौरभ कुमार सिंघल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश चंद्र छबीला ने की तथा सफल संचालन एडवोकेट अरुण कुमार सूरी ने किया।



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

आंखों के इलाज के लिए नहीं जाना होगा शहर से बाहर, मल्हीपुर रोड पर शुरू हुआ अरोड़ा आई सेंटर