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वीरेन्द्र आज़म ने साहित्यिक पत्रकारिता को एक नई ऊँचाई दी-मानस

 वीरेन्द्र आज़म ने साहित्यिक पत्रकारिता को एक नई ऊँचाई दी-मानस

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में शीतलवाणी के लघुकथा विशेषांक का लोकार्पण

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर- पोर्ट ब्लेयर में आयोजित 26वें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में देश के विख्यात साहित्यकारों ने सहारनपुर से प्रकाशित ‘शीतल वाणी’ हिंदी त्रैमासिक के लघुकथा विशेषांक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादेमी के निवर्तमान सचिव डॉ के श्रीनिवास राव और संचालन साहित्यकार अनिल पांडेय ने किया।  

अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के समन्वयक तथा छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार डॉ जय प्रकाश मानस ने कहा कि डॉ. वीरेन्द्र आज़म ने पाँच दशकों की अनवरत साधना से भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता को एक नई गरिमा और ऊँचाई प्रदान की है। साहित्य अकादेमी के निवर्तमान सचिव डॉ के. श्रीनिवास राव ने कहा कि वीरेन्द्र आज़म ने साहित्यिक पत्रिका ‘शीतलवाणी’ का कुशल संपादन कर गंभीर विमर्श और वैचारिक लेखन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए है। उन्होंने हाशिए पर छूटे प्रख्यात रचनाकारों और गुमनाम साहित्यकारों पर शीतल वाणी के विशेषांक प्रकाशित कर उन्हें मुख्य धारा में लाने का भगीरथ प्रयास किया है।प्रख्यात कथाकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट ने कहा कि बडे़ कॉरपोरेट घरानों से दूर, सहारनपुर जैसे छोटे शहर से एक स्तरीय पत्रिका का निरंतर प्रकाशन वीरेन्द्र आज़म की अटूट संकल्पशक्ति का प्रमाण है। मध्य प्रदेश के साहित्यकार वीरेन्द्र निर्झर ने कहा कि डॉ. आजम ने व्यवसायिकता के इस दौर में सकारात्मक और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता का आदर्श प्रस्तुत किया है। भुवनेश्वर के साहित्यकार कुमार प्रजापति ने कहा कि ‘शीतलवाणी’ के विशेषांक आज हिन्दी साहित्य के शोधार्थियों के लिए प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ माने जाते हैं। नागपुर के साहित्यकार कृष्ण नागपाल ने कहा कि वीरेंद्र आज़म की पत्रकारिता महज एक पेशा नहीं बल्कि साहित्यिक निष्ठा और सामाजिक सरोकार की एक जीवंत मिसाल है। अनिल पांडेय ने कहा कि वीरेंद्र आज़म ने ठेठ भारतीय भाषाई संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से जीवंत रखा हैं।

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