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बाबा साहेब के संविधान की शक्ति से ही मिली महापौर की कुर्सी- महापौर

 बाबा साहेब के संविधान की शक्ति से ही मिली महापौर की कुर्सी- महापौर

-मेला गुघाल में नगर निगम द्वारा ‘‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’’ का आयोजन

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर-मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में जीआईसी सभागार में नगर निगम द्वारा ‘‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बुद्ध व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष अपर जिला जज बिजनौर सुंदरलाल, सतीश आजाद, सपा एससीएसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती व जाटव महासभा के अध्यक्ष सुदेश जाटव, कार्यक्रम संयोजक पार्षद स्वराज सिंह व सह संयोजक नितिन जाटव, उपसभापति मयंक गर्ग, मेला अयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, पार्षद मनोज प्रजापति, संजीव कर्णवाल व पार्षद प्रतिनिधि नीरज दिवाकर, राकेश कल्याण और परविंद्र तोमर ने दीप प्रज्वलन तथा रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
भंते धम्म सागर ने तथागत बुद्ध की वंदना की।  उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और शांति के संदेश को आगे बढ़ाया और मानवता व सामाजिक विकास में शिक्षा को आधार बनाया। महापौर डॉ. अजय कुमार ने भी तथागत बुद्ध और डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शो के प्रति श्रृद्धा व्यक्त की। महापौर ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहेब का योगदान अद्वितीय है। बाबा साहेब ने स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व के मूल्यों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में विशेष स्थान दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के संविधान की शक्ति ने ही उन्हें महापौर की कुर्सी तक पहुंचाया हैं। 
अपर जिला जज सुंदरलाल ने कहा कि डॉ.अंबेडकर ने अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक समानता, न्याय और वंचित वर्ग के अधिकारों के प्रति समर्पित किया। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उनके विचार आज भी समानता, स्वतंत्रता, और बंधुत्व पर आधारित समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। सतीश आजाद ने कहा कि बाबा साहेब एक विचार है। बाबा साहेब ने एक ऐसे समाज की कल्पना की, जहां किसी व्यक्ति के साथ जाति या सामाजिक स्थिति के कारण भेदभाव न हो। उनका संघर्ष न्यायपूर्ण मानवीय समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है।  राहुल भारती ने कहा कि बाबा साहब का जीवन संघर्ष, ज्ञान और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को अधिकारों के प्रति जागरुक रहने की मिसाल देता रहेगा। कार्यक्रम संयोजक स्वराज सिंह व सह संयोजक नितिन जाटव ने सभी अतिथियों को पगड़ी पहनाकर तथा अंगवस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन किया। मनजीत मेहरा व सविता अंबेडकर ने बाबा साहब के आदर्शो और विचारों पर आधारित गीतों ने बार-बार  सभागार की तालिया बटोरी।  संचालन रविप्रकाश बौद्ध व संजय जाटव ने किया।

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