Ticker

6/recent/ticker-posts

साहित्य चेतना मंच, द्वारा किया गया विचार गोष्ठी का आयोजन

साहित्य चेतना मंच, द्वारा किया गया विचार गोष्ठी का आयोजन

रिपोर्ट-अमान उल्ला खान

सहारनपुर-स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ के अवसर पर साहित्य चेतना मंच, द्वारा "स्वाधीनता आंदोलन में वाल्मीकि समुदाय की भूमिका" विषय पर एकदिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यकम में डॉ. प्रवीन कुमार, युवा लेखक सहारनपुर की पुस्तक महावीरी देवी (1857 की काति की महान वीरांगना) का विमोचन भी किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात लेखक एंव दलित चिंतक डॉ. एन. सिंह ने की। मुख्य वक्ता कानपुर के साहित्यकार श्री देव कबीर रहें, 

विशिष्ट वक्ताओं में प्रो. विजय कायत, पूर्व कुलपति चौ. देवी लाल विश्वविधालय, सिरसा (हरियाणा), प्रो. शशि नोटियाल इतिहास विभाग, जे.वी.जैन डिगी कालेज, सहारनपुर, श्री मेहर चंद चावरिया, गाजियाबाद, डॉ. धर्मवीर सिंह, अध्यक्ष उर्दू विभाग, इग्नू दिल्ली, डॉ. अनिल कुमार, समाजशास्त्र विभाग, एम.एस.कालेज, सहारनपुर और डॉ. प्रवीन कुमार युवा लेखक सहारनपुर रहे। मुख्य वक्ता के रूप में श्री देव कबीर जी ने कहा कि मनुवादी मानसिकता के लेखको ने बडी सफाई से अछूत जातियो के इतिहास को साफ कर दिया जबकि निम्न वर्ग के न सिर्फ पुरूषो का बल्कि महिलाओ का भी स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा था। श्री मेहर सिंह चावरिया ने कहा कि वाल्मीकि सामुदाय ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बड चढकर हिस्सा लिया था हम सब को मिल कर अपने इतिहास की खोज करनी चाहिए। डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन में वाल्मीकि समुदाय की भूमिका इतिहासविदो व इतिहास के शोधार्थियो के लिए एक महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य उपल्बध कराता है जिसका अनुसरण करके इतिहास के शोधार्थी वंचित समाजो के गुमनाम स्मृति या भुला दिए गए ऐतिहासिक चरित्रो को इतिहास की मुख्यधारा में शामिल करवा सकते हैं। डॉ. प्रवीन कुमार ने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के हजारो स्त्री-पुरूषो ने न केवल भारत के स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई अपितु कई स्थानो पर आंदोलन का नेतृत्व भी किया था। अधक्षीय भाषण में डॉ. एन. सिंह ने भारत विभिन्न धर्मो और जातियो का देश है और जब तक ये सम्पूर्ण जातियां मिल कर नही लडेगी, तब तक यह देश आजाद नही हो सकता। इस बात को सबसे पहले महात्मा गांधी ने समझा और देश को आजाद करा दिया लेकिन दलित जातियों के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को सवर्ण इतिहासकारो ने नजरअंदाज किया इसे सबसे पहले डी.सी. डिंकर ने दर्ज किया और अब डॉ. प्रवीन जैसे लेखक उसे विस्तार दे रहे है। कार्यकम में वाल्मीकि समुदाय के स्वतंत्रता सेनानियों की चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जिसका उदघाटन वीर विनोद वैध ने किया। संचालन साहित्य चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. नरेद्र वाल्मीकि ने किया। कार्यकम में प्रो. महेन्द्र सिंह  बेनिवाल, डॉ. सूर्यकांत शर्मा, विनोद घावरी, भारत भूषण, धनपाल तेश्वर, संजय सूद, गौरव चौहान, मास्टर निवेन्द्र, सोनू राजोरिया, सावन बोहत, अनिल ठेकेदार, सुनील भम्भक, हरीश, दीपक आदि रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें-मण्डलायुक्त