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हिंदू समाज को संगठित होने की सबसे अधिक आवश्यकता है-गुणचैतन्य प्रकाश

हिंदू समाज को संगठित होने की सबसे अधिक आवश्यकता है-गुणचैतन्य प्रकाश

रिपोर्ट नदीम निजामी

नकुड़-सनातन धर्म लाखों वर्षों से चला आ रहा आदि और अनंत सत्य है, जिसने हिंदू समाज को सदैव राष्ट्र और मानवता की दिशा दी है। 

उक्त विचार संत प्रवर गुणचैतन्य प्रकाश ने नगर में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए रखे। उन्होंने कहा कि आज हिंदू समाज को संगठित होने की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, मंदिरों पर हमलों और पलायन की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हिंदू समाज एकजुट नहीं हुआ तो ऐसी विभीषिकाएं कहीं भी दोहराई जा सकती हैं। शांति भारत की पहचान है, लेकिन आत्मरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विभाग प्रचारक आशुतोष जी ने कहा कि आरएसएस की स्थापना हिंदू समाज को संगठित और जागरूक करने के उद्देश्य से हुई थी। संघ सौ वर्षों से सेवा, संस्कार और राष्ट्र रक्षा के कार्यों में सक्रिय है और आज 40 से अधिक क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज का हिंदू डरने वाला नहीं, बल्कि संगठित और आत्मविश्वासी है।कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष शिवकुमार गुप्ता ने अतिथियों का आभार जताया। सम्मेलन में आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग उपस्थित रहे।

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