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रोजे का मकसद तकवा और परहेजगारी है+हज़रत मौलाना मुकर्रम हुसैन

 रोजे का मकसद तकवा और परहेजगारी है+हज़रत मौलाना मुकर्रम हुसैन

रिपोर्ट डाँ ताहिर मलिक/अमन मलिक

रामपुर मनिहारान-हज़रत मौलाना मुकर्रम हुसैन ने कहा कि रोजे का मकसद तकवा और परहेजगारी है।रमजान के रोजे का मकसद यह है कि हम रमजान के बाद भी अपने आप को बुराइयों और बुरे कामों से दूर रखें। अगर हमने ऐसा किया तो हमने रमजान के पैग़ाम पर अमल किया। 

हलगोया स्थित मदरसा दारुल उलूम शब्बीरिया के प्रबंधक हज़रत मौलाना मुकर्रम हुसैन ने कहा कि रोजे का मकसद तकवा,परहेज गारी है। तकवा कहते हैं कि इंसान झूठ, चोरी,ज़िना, धोखा और तमाम बुराइयों से दूर रहे। अल्लाह और उसके रसूल के बताए हुए सीधे और सच्चाई के रास्ते पर चले। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना जिंदगी में तब्दीली के लिए आता है। रोजे की हालत में जिस तरह हम अपने आप को गुनाह के कामों से बचाते हैं, रमजान के बाद भी हम गुनाह के कामों से अपने आप को बचायें।अगर हम ऐसा करते हैं तो तब समझें कि रमजान के पैग़ाम और उसूलों पर अमल किया। मौलाना मुकर्रम हुसैन ने कहा इस्लाम की तालीम यह है कि जमीन पर जो लोग भी बसते हैं उनका धर्म कुछ भी हो, उनके साथ दया करो। उनके दुख दर्द में काम आओ, अल्लाह ताला आप पर भी रहम करेगा। उन्होंने कहा कि अपनी खुशियों में गरीब, कमजोर, बेसहारा लोगों को भी शामिल करें।उनकी ज्यादा से ज्यादा मदद करें, ताकि गरीब लोग भी अच्छी तरह ईद मना सकें।

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