‘जो कफन बांध कर निकले थे उन दीवानों को याद करो’
आकाशवाणी नजीबाबाद पर सहारनपुर के कवियों ने किया काव्य पाठ
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-आकाशवाणी नजीबाबाद केंद्र पर सहारनपुर के कवियों की काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कवियों ने राष्ट्रध्वज तिरंगा, आजादी के दीवानों की शहादत और वीरों की बहादुरी पर आधारित कविताओं का पाठ किया। इस काव्य गोष्ठी का प्रसारण स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को किया जायेगा।
काव्य गोष्ठी में कवि हरिराम पथिक ने मां सरस्वती की वंदना से काव्य गोष्ठी की शुरुआत की। उन्होंने पढ़ा-‘भक्तों का मां शारदे नमन करों स्वीकार/नाव भंवर में जो फंसी उसे लगा दो पार’। कवि नरेंद्र मस्ताना ने शहीदों को कुछ इस तरह याद किया-‘दे गये जो जान अपनी, इस वतन के वास्ते/भूल मत जाना उन्हें, हों तंग कितने रास्ते’। उन्होंने कुछ अन्य गीत भी प्रस्तुत किये। डॉ.वीरेन्द्र आज़म ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए मुक्तक पढ़ा-‘ .....उठाने से पहले नज़र तू, इकहत्तर याद कर लेना/नहीं माना जो अबके तू, तेरा लाहौर उड़ा देंगे’। उन्होंने तिरंगे की आत्मकथा गीत का भी पाठ किया। इसी कड़ी में कवि विनोद भृंग ने मुक्तक से अपने काव्य पाठ की शुरुआत की। उनके मुक्तक की बानगी देखिए-‘अट्ठारह सौ सत्तावन के, उन बलिदानों को याद करो/जो कफन बांध कर निकले थे, उन दीवानों को याद करो’।
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