युवाओं को अपनी शिक्षा के साथ अपनी मातृ संस्था के लिए भी कृतज्ञ होना चाहिए-प्रो.लूथरा
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार- खुद के रक्त,मज्जा,अस्थि से नवनिर्माण करके जीवन संचार करने वाली शक्ति का नाम माता है।प्रकृति मे मॉ को सबसे बड़ा गुरु तथा पिता को संवाहक का दायित्व प्रदान किया गया है।शिक्षा के माध्यम से गुरु समाज तथा देश के लिए श्रेष्ठ एवं अनुशासन नागरिकों का निर्माण करता है।गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय द्वारा समविश्वविद्यालय ऑडिटोरियम मे राष्ट्रीय शिक्षक दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।दीप-प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के माध्यम से कार्यक्रम का शुभारम्भ कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा एवं कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निगमालंकार एवं अन्य वरिष्ठ प्रोफेसर की उपस्थिति मे सम्पन्न हुआ।
अपने संबोधन मे कुलपति प्रो.लूथरा ने कहा कि विद्यार्थी अपने चरित्र एवं कार्य से संस्था तथा खुद को सिद्ध करता है। युवाओं को अपनी शिक्षा के साथ अपनी मातृ संस्था के लिए भी कृतज्ञ होना चाहिए। कुलसचिव प्रो.सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि क्रान्ति के बिना जीवन मे शांति नहीं आ सकती।शिक्षा-दीक्षा एवं चरित्र आज के युवाओं की जीवन शैली को सर्वाधिक प्रभावित कर रहा है। कृतज्ञता के बिना छात्र जीवन मे मर्यादाओं का पालन संभव नहीं है। वित्ताधिकारी प्रो.वी.के.सिंह ने गुरु के सानिध्य मे रहकर विद्यार्थियों को उत्तम नागरिक बनने पर जोर दिया,वही आई.क्यू.ए.सी.डायरेक्टर प्रो.पंकज मदान ने शिक्षा मे बदलाव तथा युवाओं को होने वाले फायदों पर चर्चा की।मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो.एल.पी.पुरोहित ने उत्तम समाज के निर्माण मे गुरु के योगदान पर अपना पक्ष प्रस्तुत किया।कार्यक्रम मे पूर्व कुलपति प्रो.प्रभात कुमार,प्रो.नवनीत,प्रो.ब्रह्मदेव,प्रो.राकेश जैन,प्रो.कर्मजीत भाटिया,प्रो.सुरेखा राणा,प्रो.नमिता जोशी,प्रो.सीमा शर्मा,प्रो.मुदिता अग्निहोत्री,प्रो.आभा शुक्ला,प्रो.अंजलि गोयल,डॉ संगीता मदान,डॉ रितु अरोड़ा,डॉ वरिंदर विर्क,डॉ.दीपा गुप्ता,डॉ.रीना वर्मा,डॉ.ऋचा सक्सेना,डॉ.अजय मलिक,डॉ.बिन्दु मलिक,डॉ.इन्दु गौतम सहित सभी संकायों के शिक्षक,शिक्षकेत्तर कर्मचारी,छात्र एवं छात्रायें उपस्थित रही।कार्यक्रम का संचालन डॉ.कल्पना सागर तथा डॉ.शिवकुमार चौहान द्वारा किया गया।धन्यवाद ज्ञापन,राष्ट्रगान एवं शांति पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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