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हमें सदैव अपने गुरुओं का सम्मान करना चाहिए- रविकांत मलिक

 हमें सदैव अपने गुरुओं का सम्मान करना चाहिए- रविकांत मलिक

 रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार-गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय-विभाग के प्रांगण में शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर गुरुजनों के सम्मान हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुकुल कांगड़ी के मुख्याधिष्ठाता डॉ.दीनानाथ शर्मा ने की।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक ब्रह्मचारियों के प्राण होते हैं।ब्रह्मचारियों का हृदय कोमल होता है,उस पर अंकित किया गया एक-एक संस्कार जीवन भर उसके चरित्र में झलकता है।विद्या ही मनुष्य के सर्वांगीण विकास का श्रेष्ठ माध्यम है और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए गुरुकुल की ख्याति पिछले 124वर्षों से सम्पूर्ण विश्व में बनी हुई है।इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ.विजेन्द्र शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल के इन ब्रह्मचारियों पर ही देश का भविष्य टिका है।इन्हीं में सुरक्षित कल निहित है।यही ब्रह्मचारी आर्य परम्परा को आगे बढ़ाएंगे और महर्षि दयानन्द सरस्वती के स्वप्नों के भारत का निर्माण करेंगे।इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविकांत मलिक ने कहा कि एक शिक्षक ही समाज की वास्तविक नींव रखता है।उन्होंने एक माँ और बेटे की कहानी सुनाते हुए बताया कि एक बेटा अपने जीवन में सफल होकर अपनी माँ से बोला कि यह सब मेरी मेहनत से हुआ है,तब माँ ने मुस्कुराते हुए कहा कि बेटा,तुम्हारी इस सफलता के पीछे तुम्हारे गुरु का दिया हुआ ज्ञान और संस्कार है।गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है।अतः हमें सदैव अपने गुरुओं का सम्मान करना चाहिए।इस अवसर पर बाल सभा के अध्यक्ष अमर सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं,बल्कि कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। आज हम जो कुछ भी हैं,अपने गुरुओं के आशीर्वाद और उनके दिए हुए संस्कारों से हैं।कार्यक्रम के संयोजक वेदपाल सिंह ने कहा कि गुरुकुल में सभी पर्व आर्य पद्धति के अनुसार मनाये जाते हैं,जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रह्मचारियों के उत्तम चरित्र का निर्माण करना है।गुरुकुल के सभी शिक्षक आर्य परंपरा का पालन करते हुए स्वामी श्रद्धानन्द के स्वप्न को साकार करने हेतु संकल्पित हैं।गुरुकुल के अध्यापक अशोक कुमार आर्य ने कहा कि यह दिवस डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मोत्सव पर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है,वे भारत के राष्ट्रपति थे परन्तु उससे पूर्व एक उत्तम शिक्षक थे,उनके जीवन में अनुशासन महत्वपूर्ण अंग के रूप में परिणत था।कार्यक्रम में विद्यालय-विभाग के प्रार्थना में जितेन्द्र कुमार वर्मा,अशोक कुमार आर्य,हुकमचन्द,अश्विनी कुमार,अमर सिंह,ब्रजेश सिंह ,वेदपाल सिंह,लोकेश सिंह,अमित कुमार,राज कमल,अशोक कुमार,विजय कुमार,धर्म सिंह ,गौरव शर्मा,मामराज सिंह,सत्यवीर सिंह,रविकांत मलिक,फकीरचन्द,रोहित बालियान,दिनेश कुमार ,सज्जन सिंह,उदयराज,प्रभात मलिक,धीरज दत्त कौशिक,तुषार सिंह,मुकेश,अनुज,भास्कर पाण्डे ,सुभांशु,योगेश शर्मा,धर्मेन्द्र आर्य,धर्मेन्द्र सिंह,गौरव मलिक,मोहित,अनिल,राहुल,विकास,आदर्श भारद्वाज,समस्त अधिष्ठातागण एवं समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।

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