गुरु की प्रकृति में गुरु बिना शिष्य तथा शिष्य बिना गुरु का अस्तित्व निराधार
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-प्रकृति में गुरु बिना शिष्य तथा शिष्य बिना गुरु का अस्तित्व निराधार है।कसौटी पर कसा हुआ शिष्य जीवन की कठिनाईयों पर विजय प्राप्त करके लक्ष्य प्राप्त करने मे सफल होता है।शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग,गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय मे प्रशिक्षु छात्रों द्वारा गुरु वंदन एवं नव आगन्तुक छात्रों का स्वागत समारोह आयोजित किया।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.शिवकुमार चौहान ने कहा कि गुरु केवल वाहय गुणों की खान नही,अपितु शिष्य को अन्तःवासी रखकर युग निर्माता के रूप मे शिष्य का नवनिर्माण करता है।राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर छात्रों ने जीवन में गुरु की महत्ता पर काव्य,गीत,प्रेरक कहानियॉ एवं मनोरंजनात्मक खेलो का आयोजन किया।शिक्षकों एवं छात्रों ने भारत रत्न एवं प्रथम नागरिक सर्वपल्लीराधाकृष्णन को अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।शिक्षकों के सम्मान मे छात्रों ने कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।डॉ.अजय मलिक,डॉ.कपिल मिश्रा,डॉ.अनुज कुमार,डॉ.प्रदीप कुमार,दुष्यंत सिंह राणा,सुनील कुमार,कुलभूषण शर्मा,अश्वनी कुमार,कुलदीप रतूडी,आदि उपस्थित रहे। आदित्य कश्यप,अनुभव,अक्षय,हितिक चन्द्रा,अनुराग सिंह राणा,अनिरुद्ध,अमन सागर ने कार्यक्रम का संचालन किया।दिवाकर कश्यप,रविन्द्र परमार,कुलदीप,राजेन्द्र कुमार,सुरेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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