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छोटे किरदारो की मेहनत पर सजती है प्रभु श्री राम की लीला

 छोटे किरदारो की मेहनत पर सजती है प्रभु श्री राम की लीला

गुमनाम किरदारों का निस्वार्थ अभिनय ही बनता है लीला की सफलता का पैमाना

महागाथा की संपूर्णता और जीवांतता में इन किरदारों का बड़ा योगदान

गुरु वशिष्ठ से सुग्रीव तो कोई केवट से विभीषण तक देते है दमदार प्रस्तुति

रिपोर्ट अमित मोनू यादव

सहारनपुर-प्रभु राम की लीला में यू तो भगवान राम खुद ही इस महागाथा के महा नायक होते हैं और सारी निगाहें,कथा और कहानियां भी उन्हीं के इर्द गिर्द ही घूमतीं हैं। लेकिन फिर भी इस महागाथा को संपूर्णता और जीवंतता प्रदान करने में उन गुमनाम किरदारों का योगदान सबसे बड़ा होता है, जिनके बिना राम की रामायण और कथा दोनों अधूरी है।

आयोजकों का कहना है कि राम लीला की असली सुंदरता उसके छोटे किरदारों में बसती है। गुरु वशिष्ठ का आशीर्वाद, केवट की निश्छल भक्ति, सुग्रीव की मित्रता, विभीषण का धर्म और अहिरावण की माया,इन्हीं से पूरी लीला संपूर्ण होती है।मुख्य कलाकार तो मंच पर चमकते ही हैं, लेकिन ये गुमनाम किरदार अपनी निष्ठा से लीला में प्राण डाल देते हैं। दर्शकों की तालियां ही बताती हैं कि राम की लीला, इन छोटे किरदारों की भी है। मुख्य किरदार तो सब निभा लेते हैं, लेकिन इन छोटे किरदारों को जीवंत करना ही असली अभिनय है।आज आपके बीच कुछ ऐसे किरदारो को ला रहे  जिनके बिना लीला का सफल मंचन हो पाना मुमकिन नहीं है।कॉमर्स ग्रेजुएट यतिन अरोड़ा नोएडा स्थित एमएनसी में कार्य करते हैं और कुंभकरण का किरदार करते है  श्री राम लीला के प्रति  इनके समर्पण इतना है कि वो छुट्टी लेकर अपने किरदार को  निभाने आते है।लंबे और डीलडोल यतिन इस बार गांधी पार्क की लीला में कुंभकरण का अभिनय को पर्दे पर मूर्त दे रहे है। यतिन का कहना कि उनके जैसे असंख्य किरदार है जिनके बिना लीला का मंचन संभव नहीं है। यतिन का कहना है  जिस दिन उनका रोल होता है वो नाइट गोल्डन नाइट कहलाती और  दर्शकों से भरा पंडाल उनको और बेहतर करने का जज्बा देता है वो पूरा साल इसी दिन का इंतेज़ार करते है।
श्री आशुतोष समिति के संदीप सन्नी भाटिया एक ऐसे अहम कलाकार हैं जो लीला में ना जाने कितने ही किरदारो में समाए हुए है,कभी मंथरा,कभी सुग्रीव ,तड़का की सेना,दरबार के मंत्रीगण हो या गुरु वशिष्ठ।। सन्नी भाटिया चीनी व्यापारी के साथ भाजपा के बूथ अध्यक्ष है। सन्नी अपनी लीला को सफल बनाने में कई तरह व्यवस्थाओं में भी अग्रणी भूमिका निभाते है। सन्नी श्री राम के अनन्य भक्त और उनका जीवन भी उनकी आराधना में ही व्यतीत हो ये उनकी कामना है,कॉमर्स ग्रेजुएट टायर व्यवसायी और दो बच्चों के पिता सुमीत क्वात्रा उत्तर रेलवे नाटक क्लब के कई किरदारों का संजीव अभिनय कर लीला का सफल मंचन करने में सहायक बनते है। सुमीत किष्किंधा नरेश हो,दरबार में मंत्री हो या नगरवासी हो सुमीत हर छोटे से छोटे अभिनय कर श्री राम के चरणों में अर्पित कर देते हहालांकि सुमीत को ये मलाल है कि मीडिया मुख्य पात्रों के आगे उन जैसे छोटे कलाकारों को ज्यादा तवज्जो नहीं मिलती है,जबकि वो भी अपना श्रेष्ठ अभिनय देने में को कोई कसर नहीं छोड़ते है और  मुख्य किरदारों के बराबर ना सही तो लेकिन काफी हद्द तक लीला की सफलता में योगदान तो करते ही है।पाताल से पंडाल तक अहिरावण का मायावी किरदार निभाने वाले  पवन भट्ट भी किरदारों की श्रृंखला में एक ऐसा चेहरा है जिसने लीला के मंच पर न जाने कितने ही किरदारो को साकार किया है अहिरावण के अभिनय से अपनी पहचान बनाने वाले पवन कहते हैं भले ही अहिरावण मुख्य पात्र ना लेकिन अहिरावण के बिना भी लीला पूर्ण नहीं होती है। छोटे मोटे किरदार के साथ वो व्यवस्था में एलईडी स्क्रीन पर दृश्यों को प्रसारित करते है।पवन का कहना कि वो मंच पर अहिरावण हो लेकिन निजी जीवन में वे सच्चे राम भक्त है।

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