शिव की शरणागति में ही जीव का परम कल्याण -स्वामी कालेंद्रानंद
रिपोर्ट-अमान उल्ला खान
पार्थिव शिवलिंग पूजा महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा पार्थिव शिवलिंग पूजा भगवान भोलेनाथ की सभी पूजा में श्रेष्ठ मानी जाती है क्योंकि यह पूजा पार्वती मां ने शिव को प्राप्त करने के लिए एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनका विधिवत अभिषेक कर विसर्जन किया फल स्वरूप मां पार्वती को शिव की प्राप्ति हुई। यही पूजा श्री हरि विष्णु के द्वारा भी की गई जिसके द्वारा भोलेनाथ ने उन्हें अक्षय फल प्रदान किया। महाराज श्री ने कहा पार्थिव शिवलिंग पूजा मैं जैसे-जैसे पार्थिव शिवलिंग पर मंत्र उच्चारण कर जलाभिषेक होता है तो शिवलिंग जल में जैसे-जैसे गलता जाता है वैसे ही जीव के पाप भी भोलेनाथ अपनी ब्रह्म अग्नि से गलते जाते हैं पार्थिव शिवलिंग पूजा करने से जीव के कर्म बंधन करते हैं अर्थात 84 के चक्कर से इस मुक्ति मिलती है ऐसा कोटी रूद्र संहिता में वर्णन आता है जो जीव पार्थिव शिवलिंग पूजा 108 बार कर लेता है भोलेनाथ उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट कर उसे अपना पार्षद तक नियुक्त कर देते हैं और उसे जगत में रहते हुए विशिष्ट ख्याति प्राप्त होती है और अंत में भगवान के शरण में जाकर मोक्ष प्राप्त होता है। उन्होंने कहा पार्थिव शिवलिंग पूजा साक्षात भगवान का रूद्र रूप है जो पापों को भस्मिभूत कर देता है और जीवों का कल्याण करता है प्रत्येक जीव को विशेषता श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग पूजा अवश्य करनी चाहिए शिव की शरणागति में ही जीव का परम कल्याण है इस अवसर पर मेहरचंद जैन राजेंद्र धीमान अश्विनी कंबोज सागर गुप्ता संजय राणा अनिल कुमार दिग्विजय पुंडीर अनिल कश्यप विवाह संगीता प्रभा ममता अत्रि महिमा सविता शैलेश स्वामी आदि रहे

0 टिप्पणियाँ