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ग्लोकल विश्वविद्यालय नशा मुक्ति सप्ताह के अंतर्गत हुआ गोष्ठी का आयोजन

ग्लोकल विश्वविद्यालय नशा मुक्ति सप्ताह के अंतर्गत हुआ गोष्ठी का आयोजन

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर-ग्लोकल विश्वविद्यालय में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति सप्ताह के दूसरे दिन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) द्वारा ग्लोकल विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान की मुख्य वक्ता वोकेशनल स्कूल की डीन डॉ रेशमा ताहिर रहीं।

डॉ रेशमा ताहिर ने कहा कि नशा उन्मूलन केवल एक सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण का आधार है। नशे की लत व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देती है। इसके कारण परिवारों में कलह बढ़ती है, शिक्षा और रोजगार प्रभावित होते हैं तथा समाज में अपराध और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर उपस्थित  कर्मचारियों ने भी अपने अपने प्रश्न पूछ कर अपनी शंका का समाधान किया, और नशा न करने की प्रतिज्ञा ली।इसी क्रम में तीसरे दिन ग्लोकल हॉस्पिटल में राष्ट्रीय सेवा योजना   का शिविर लगाया गया। जिसमें ओ.पी.डी. में आने वाले मरीजों को डॉ. गौरव गोयल और डॉ नीतिका चौहान सहित अन्य चिकित्सकों ने नशे से होने वाली हानि के बारे मे बताते हुए रोगियों का उपचार किया।नशा उन्मूलन हेतु यह उपचार निःशुल्क किया गया।राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शोभा त्रिपाठी ने  भी रोगियों को समझाते हुए कहा कि कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण में परिवार, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और सरकार सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श सेवाओं और जनभागीदारी के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। विशेष रूप से युवाओं को खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़कर उनकी ऊर्जा को सही दिशा दी जा सकती है। सामूहिक प्रयासों से ही हम एक स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त भारत का सपना साकार कर सकते हैं।शिविर के अंत में  कार्यक्रम अधिकारी जमीरुल इस्लाम ने सभी अतिथियों, मुख्य वक्ता एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित भी किया।

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