संस्कृति व संस्कारों के साथ से ही श्रेष्ठ चरित्र निर्माण-कुलदीप
-मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’का आयोजन
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-नगर निगम द्वारा मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में जीआईसी सभागार में स्पिक मैके एवं स्पर्श प्रयास के सहयोग से ‘‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विभाग प्रचारक कुलदीप कुमार, नगर विधायक राजीव गुंबर, भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन व हेमंत अरोड़ा, सीनियर सिटीजन वेल्फेयर एसोसियेशन के अध्यक्ष के एल अरोड़ा, दल नेता राजेंद्र कोहली, उपसभापति मयंक गर्ग, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, कार्यक्रम संयोजक मनोज प्रजापति, मेला अयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान, सहसंयोजक ज्योति अग्रवाल, सीमा कात्यायनी, महिला मोर्चे की प्रदेश मंत्री नूतन शर्मा आदि ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर व रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
‘स्पर्श’ के तत्वावधान और पंकज मल्होत्रा के निर्देशन में विभिन्न वाद्य यंत्रों पर संगीत की शिक्षा ले रहे पांच वर्ष से 12 वर्ष तक के बाल संगीतकारों ने जब अपनी एक साथ प्रस्तुति दी तो सभागार तालियों से गूंज उठा। कलाकारों ने विभिन्न भारतीय शास्त्रीय वाद्यों द्वारा बहु प्रचलित राग किरवानी की प्रस्तुति दी जिसमें 1950 से राग 2026 तक फिल्म के गानों में राग किरवानी का प्रयोग भी दिखाया गया। सरोद पर रुद्र, अथर्व, अवंतिका, सिदक, गर्व, परीशा, सितार पर कवनप्रीत अनन्या, इसराज पर अमान्या, शुभ, संतूर पर अपूर्वा ,मनका, बासुरी पर दैविक गर्वित, शुभ ने किरवानी राग की परंपरागत गत में तानों को बुनते हुए झाला प्रस्तुत किया। कथक नृत्य की प्रस्तुति में दिल्ली से पधारी गुरु मालती श्याम (लखनऊ घराना) के दल में शामिल अश्विनी सोनी, गौरी, हर्षिता, बादल, हर्षिता शर्मा, डोल्मा गुप्ता, हर्षिता द्विवेदी ने कृष्ण प्रसंग पर नृत्य एवं तराना प्रस्तुत कर एक के बाद एक शानदार प्रस्तुति देते हुए सभागार में बैठे लोगों को भावविभोर कर दिया। विभाग प्रचारक कुलदीप जी ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संगीत और ये वाद्य यंत्र हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। हम इन्हें भूले हुए है, हमें अपनी संस्कृति व संस्कारों को साथ लेकर चलना होगा तभी हम श्रेष्ठ चरित्र निर्माण कर सकेंगे। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि कोई भी वाद्य यंत्र हो, वह हमारी संस्कृति, विरासत और हमारा धर्म है। उन्होंने कहा कि संगीत और नृत्य मंदिरों से निकला है, बाद में इसे दरबारों की रौनक बना दिया गया। उन्होंने बाल संगीतकार बच्चों से एक-एक कर परिचय लिया। उन्होंने बच्चों की कला को नमन करते हुए कहा कि ये बच्चे केवल संगीत की ही प्रस्तुति नहीं दे रहे हैं बल्कि अपनी संस्कृति और विरासत को आगे ले जाने के लिए तप कर रहे हैं। स्पिक मैके व स्पर्श के संचालक पंकज मल्होत्रा व शैफाली को भी इस साधना के लिए साधुवाद दिया। इससे पूर्व पार्षद दीपक रहेजा, सुलेख चंद, अरुण गुप्ता, अनुज जैन, सोपिन पाल, नीरज शर्मा, मुरारी खेतवाल, राहुल झाम, जसबीर मोघा, पार्षद प्रतिनिधि नितिन जाटव, राकेश कल्याण, नीरज दिवाकर, अक्षु छाबड़ा, अनिल शर्मा के अतिरिक्त राजकुमार मक्कड़, जोगेंद्र लाला, सन्नी सेठी, पूर्व पार्षद मनोज जैन व मानसिंह जैन, सुशील प्रजापति, अजय सिंघल (उड़ान), ललित कटारिया, शीतल टण्डन, मनीष अरोड़ा, सूर्य प्रताप राणा व विवेक मनोचा आदि का संयोजक मनोज प्रजापति ने अंगवस्त्र पहना कर स्वागत और अभिनंदन किया।

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