महापौर ने किया लोक संगीत की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान
- मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में ‘लोक संगीत’ संध्या का आयोजन
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में जीआईसी सभागार में नगर निगम द्वारा ‘लोक संगीत’ संध्या का आयोजन किया गया। पूर्व विधायक रवीन्द्र कुमार मोल्हू, पाल समाज के संरक्षक बलजीत चौधरी, मेला चेयरमैन पार्षद संजय सैनी, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष पार्षद दिग्विजय चौहान, दल नेता, पार्षद राजेंद्र कोहली, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, सह संयोजक ज्योति अग्रवाल, भाजपा महिला मार्चा की प्रदेश मंत्री नूतन शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष हेमंत अरोड़ा, कार्यक्रम संयोजक सोपिन पाल, पार्षद अरुण गुप्ता तथा महानगर महामंत्री किशोर शर्मा ने भारत माता व माता अहिल्या बाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया।
लोकगीत संध्या का शुभारंभ महापौर डॉ. अजय कुमार तथा उक्त नेताओं के अलावा पार्षद मुरारी खेतवाल, नीरज शर्मा, सलेखचंद, महानगर महामंत्री ललित कटारिया, मण्डल अध्यक्ष जोगेंद्र लाला, पार्षद प्रतिनिधि नीरज दिवाकर, राकेश कल्याण, नितिन जाटव, अनिल शर्मा, भाजपा नेत्री सरोज शर्मा व विक्रम शर्मा और राजीव गुप्ता ने रिबन काटकर संध्या का शुभारंभ किया। कार्यक्रम संयोजक सोपिन पाल व सहसंयोजक जोगेंद्र लाला ने सभी अतिथियों व पार्षदों को पटका पहनाकर उनका स्वागत किया।अयोध्या से आये सत्यांशु पटेल ने दुर्गा स्तुति से संध्या का श्रीगणेश किया। पटेल ने अपने साथी कलाकारों के साथ अनेक प्रस्तुतियां दी। उन्होंने ‘रामजी के नमवा के ना जाने ला’, ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’,‘कान्हा-कान्हा रटेली राधा प्यारी’, के अलावा ‘मिर्जापुर कइला गुलजार...’ तथा ‘ए सजनी ए सजनी....’फोक और ‘किसको दिल दिया जाए सोचना जहरीले...’ग़ज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी। पटेल की प्रस्तुति ‘जरा देर ठहरो राम तमन्ना यही है/अभी हमने जीभर के देखा नहीं है’ ने संध्या को शिखर पर पहुंचा दिया। ढोलक पर अमित कुमार, की बोर्ड बैंजों पर धर्मेन्द्र सिंह, पैड पर विख्यात मिश्रा तथा सहगायन में अमन शर्मा ने सत्यांशु का स्वर और गीतों के भाव के अनुरुप भरपूर साथ दिया। महापौर डॉ. अजय कुमार ने युवाओं से लोकगीतों, कला-संगीत और परंपरागत वाद्य यंत्रों का ज्ञान अर्जित कर देश की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोक संगीत इधर-उधर से नहीं मंदिरों और आश्रमों से आया है। पर आज हमारी यह परंपरागत विरासत कहीं पीछे छूट रही है। समाज को लोकसंगीत के प्रति जागृत करने के उद्देश्य से ही लोकगीत संध्या का आयोजन रखा गया है। महापौर ने कहा कि 2047 में विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए हमें अपनी विरासत को साथ लेकर चलना होगा। कार्यक्रम का संचालन जोगेंद्र लाला ने किया।

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